बिहार के जनता परिवार महाठगबन्धन के ताज़ा राजनैतिक हालात पर कुछ लिखा गया...
क्या पुराना क्या नवेला देखिये
नीम पर चढ़ता करेला देखिये
रंग पहले ही नहीं था दाल में
स्वाद भी अब है कसैला देखिये
थी जहाँ खेती गुलाबों की कभी
आज उसका रूप मैला देखिये
कूक भरती थी कभी कोयल जहाँ
तीतरों का आज रेला देखिये
जो "समाजों" के मिले "वादी" यहाँ
देखिये झोला कि थैला देखिये
आइये, आ जाइए अब आप भी
बैठिये रंगीन मेला देखिये
खाइए चारा, जुगाली कीजिये
और पटना का तबेला देखिये
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०७:४६ अपराह्न, मंगलवार, २८ अप्रैल २०१५